आजकल, देश की इकट्ठी हुई संपत्ति को लेकर अत्यधिक विज्ञापन हो रही है, लेकिन वास्तविकता कुछ भिन्न है। आंकड़े बताते हैं कि नौकरी की कमी की �
क्या प्रचार ही सब कुछ है? भारत की अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी की हकीकत
आजकल, यह राष्ट्र की सम्पत्ति को लेकर काफी विज्ञापन हो रही है, लेकिन हकीकत कुछ भिन्न है। आकडे बताते हैं कि बेरोजगार होना की दर ऊपर जा रही
क्या प्रचार ही सब कुछ है? बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जनता की हकीकत
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